Al-Risala · March 2025 · page 15

اختلاف ایک آزمائش

الرسالہ، مارچ ۲۰۲۵، صفحہ ۱۵

यह कि वह अपना तमाम इच्छाओं को अधूरा छोड़कर जाता ही यह इस बात का इशारा है कि यह दुनिया इच्छाओं को पूरा करने की जगह नहीं है। सच्ची और पूरी संतुष्टि केवल अगली दुनिया में ही संभव है। बुद्धिमान वह है, जो इस संकेत को समझे और वर्तमान जीवन को एक तैयारी का चरण मानते हुए खुद को अगली दुनिया के योग्य बनाए। जीवन कर्म का एक चरण है और मृत्यु अल्लाह की अदालत में पेशी का समय। यह हर व्यक्ति के लिए अत्यंत गंभीर मामला है। समझदार वही है, जो इस मामले को समझे और इसे अपनी सबसे बड़ी चिंता (Supreme Concern) बनाए। शुक्र: एक कुर्बानी का अमल शुक्र (कृतज्ञता) सबसे बड़ी इबादत है। यह जन्नत की कीमत है, क्योंकि बिना शुक्र के ईमान अधूरा होता है। अगर दिल में कृतज्ञता नहीं है, तो अल्लाह की सच्ची इबादत मुमकिन नहीं। शुक्र हमें उन ऊँचे आध्यात्मिक एहसासों तक पहुँचने में मदद करता है, जिन्हें कुरआन में "रब्बानियत" (आले इमरान: 79) कहा गया है। इसका मतलब है, अल्लाह से गहरा जुड़ाव और आध्यात्मिक समझ।

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