शादाबी लौट आई
الرسالہ، مئی ۲۰۲۵، صفحہ ۱۶
यह एक प्रतीकात्मक रूप में इंसान के लिए एक सबक हो इंसान के शारीारक जीवन के लिए भी यह ज़रूरी है कि उसे "पानी" मिलता रहे। जिस इंसान को इस पानी से वंचित कर दिया जाए, उसकी शख्सियत भी सूखे पेड़ जैसी हो जाएगी। इंसानी जीवन के लिए यह जीवनदायी पानी अल्लाह की रहमत है। इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह के साथ निरंतर आध्यात्मिक संबंध बनाए रखे। इसी संबंध से उसे जीवन्तता मिलेगी। अगर यह संबंध किसी कारणवश टूट जाए तो उसकी हालत सूखे पेड़ की तरह हो जाएगी। अल्लाह से इस संबंध का माध्यम "ज़िक्र" (स्मरण) है। यह किसी विशेष दुआ का नाम नहीं है बल्कि यह अलग-अलग स्थितियों में उसे बार-बार याद करना है। जैसे इस पेड़ को देख कर हमने अल्लाह के चमत्कार को देखा और दिल से दुआ की: "हे अल्लाह, जिस तरह इस पेड़ को हरा किया है, वैसे ही मुझे भी जीवन्तता से भर दे।" ऐसी सोच के साथ जीने वाला इंसान हर चीज़ में अल्लाह के काम की झलक पाता है। वही समझदार है जो इस रब्बानी फैज़ (रहमत) को अपनी ज़िंदगी में अपनाता है। _ क्रोध को त्याग दो _ हज़रत अबू हुरैरा कहते हैं कि अल्लाह के रसूल की ख़िदमत में एक व्यक्ति आया और बोला: मुझे उपदेश दीजिए। आपने फ़रमाया: “क्रोध को त्याग दो।” उसने दोबारा कहा: मुझे उपदेश दीजिए। आपने फिर फ़रमाया: “क्रोध को त्याग