शादाबी लौट आई
الرسالہ، مئی ۲۰۲۵، صفحہ ۱۵
सच्चे अमल का मापदंड यह है कि उस पूरा तरह अल्लाह का खातिर किया जाए। और सच्ची दुआ का मापदंड यह है कि उसे सम्पूर्ण असहायता की स्थिति में किया जाए। खुदा की तरफ़ से सच्चे अमल की प्रेरणा उसे मिलता है जो अपने अंदर से पूरी तरह से दिखावे और दोगलेपन को निकाल दे, जिसके कथन और कर्म में कोई फर्क न रहे, और जो अपनी कमजोर शख़्सियत को बदल सके। इसी तरह, खुदा की तरफ़ से सच्ची दुआ की प्रेरणा उसे मिलती है जो अपने शुऊर (conscious) को इस स्तर तक बढ़ा ले कि वह अल्लाह की शक्ति के सामने अपनी पूरी असहायता को महसूस कर सके। इस स्तर पर पहुँच कर ही किसी को सच्ची दुआ हासिल होती है। वास्तव में सच्ची दुआ और सच्चा अमल अलग नहीं हैं। सच्ची दुआ में सच्चा अमल शामिल होता है, और सच्चा अमल हमेशा सच्ची दुआ की बुनियाद पर ही पैदा होता है। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से, सच्चे अमल और सच्ची दुआ को अलग नहीं किया जा सकता। सच्चा अमल वास्तव में "हक़ीक़ी अमल" का दूसरा नाम है, और सच्ची दुआ "हक़ीक़ी दुआ" का दूसरा नाम।
शादाबी लौट आई
दिल्ली में मेरी रहने की जगह के पास एक पेड़ है, जिसे मैं "स्पिरिचुअल ट्री"