Al-Risala · November 2025 · page 55

जनता और शासक के बीच क़ानूनी बराबरी

الرسالہ، نومبر ۲۰۲۵، صفحہ ۵۵

बन ता आपन सबा का दूसर सरकारी कामा म लगा दिया आर कहा, "मेरा हिफ़ाज़त के लिए अल्लाह ही काफ़ी है।" यह उस शख्स् का हाल था जिसके साम्राज्य की सीमाएं सिन्ध से लेकर फ्रांस तक फैली हुई थीं। आप की ख़िलाफ़त के ज़माने की एक और घटना है। समरकंद के निवासियों का एक प्रतिनिधि मंडल आपसे मिलने आया। उसने एक फौजी सरदार कुतैबा बिन मुस्लिम बाहली के बारे में शिकायत की कि इस्लामी नियम के मुताबिक़ उन्होंने हमकों पूर्व सूचना नहीं दी। और हमारे शहर में अचानक अपनी फौजें भेज दीं लिहाज़ा हमारे साथ इंसाफ किया जाए। समरकंद की विजय हज़रत उमर बिन अब्दुल अजीज़ से पहले हुई थी और अब उसके सात साल बीत चुके थे पर आपने इंसाफ के तकाज़े को पूरा करना ज़रूरी समझा। हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ ने ईराक के हाकिम को लिखा कि समरकंद के लोगों के मुकद्दमों की सुनवाई के लिए एक विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया जाए। इराक के प्रशासक ने तुरन्त आदेश का पालन किया और जमी बिन हाजिर अल बाहली को इसका काज़ी (न्यायाधीश) नियुक्त कर दिया उनकी अदालत में मुकद्दमा पेश हुआ। दोनों पक्षों ने खुलकर अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं अन्त में काज़ी (जज) ने समरकंद वालों की शिकायत को सही ठहराते हुए फैसला सुनाया: मुसलमानों की फ़ौज समरकंद को छोड़कर बाहर आ जाए। समरकंद वालों को उनका किला और अन्य चीजें वापस कर दी जाएं। इसके बाद इस्लामी

‹ Previous page Next page › Contents of November 2025 All issues

Printed page