Al-Risala · January 2025 · page 3

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الرسالہ، جنوری ۲۰۲۵، صفحہ ۳

अपन दायर से निकल कर दूसर दायर मे दाख़िल नही होता। यहा बात कुरान मे इन शब्दों में कही गई है:

"और सूरज, वह अपनी ठ ठहराई हुई राह पर चलता रहता है। यह प्रभुत्वशाली (अज़ीज़) व ज्ञानवान (अलीम) का बांधा हुआ अंदाज़ा है। और चांद के लिए हमने मंजिलें निर्धारित कर दीं, यहां तक कि वह ऐसा रह जाता है जैसे खजूर की पुरानी शाख़ा। न सूरज के वश में है कि वह चांद को पकड़ ले और न रात दिन से पहले आ सकती है। और सब एक-एक दायरे में तैर रहे हैं।" (36:38-40)

इन आयतों में उस आकाशीय सच्चाई की तरफ़ संकेत किया गया है कि इस क्रायनात के तमाम घूमने वाले सितारे और सैय्यारे (गृह व नक्षत्र) अपनी-अपनी दायरे (orbit) में ठीक-ठीक और सुनिश्चित ढंग से घूमते हैं। वे कभी अपनी हद को छोड़कर दूसरे की हद में दाख़िल नहीं होते। यही हदबन्दी या सीमाबद्धता इंसान के लिए भी आदर्श है। कुरान में कहा गया है कि जो लोग खुदा की क्रायम की हुई हदों को तोड़ते हैं वे खुदा की नज़र में ज़ालिम (अत्याचारी) हैं। (2:229)

यही बात हदीस में इन शब्दों में कही गई है:

"और अल्लाह ने हदें क्रायम कर दी हैं। तो तुम उन हदों का उल्लंघन न करो" (मुसतदरक अल-हाकिम, हदीस संख्या 7114)

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