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الرسالہ، جنوری ۲۰۲۵، صفحہ ۸
1989 का खुश्फ़ का यह रिपाट पूरा का पूरा प्रकाशित का है, और उसका नाम है — व्यक्तिपूजा और उसके प्रभावः On the personality cult and its consequences. मौजूदा दुनिया में आदमी सरकशी करता है। वह अपनी बड़ाई क़ायम रखने की ख़ातिर हक़ को मानने से इन्कार कर देता है। फिर भी उसको अपनी अस्ल हैसियत पर पर्दा डालने के लिए ख़ूबसूरत अल्फ़ाज़ मिल जाते हैं। वह समझता है कि मैंने हमेशा के लिए अपने काले कारनामों को छुपा लिया। मगर जिस तरह स्टालिन के लिए “6 अप्रैल” की तारीख तय थी और उस तारीख के आते ही वह सारी दुनिया के सामने बेनक़ाब हो गया, उसी तरह हर इन्सान के लिए एक “6 अप्रैल” है। उसके आते ही हर आदमी की सच्चाई पहले पेज की ख़बर बन जाएगी, जिस तरह 6 अप्रैल 1989 को स्टालिन की सच्चाई पहले पेज की ख़बर बन गई। यह दिन बहरहाल हर इन्सान के लिए आने वाला है, चाहे वह आज आए या आज से 50 साल बाद। ग़रीबी का सबब टाइम्स आफ़ इंडिया ने 'सोसायटी' के नाम से एक परिशिष्ट (नवम्बर-दिसम्बर 1988) प्रकाशित किया था। उसमें टाइम्स आफ़ इंडिया (4 दिसम्बर 1880) की एक ख़बर नक़्ल की गई है। उस वक़्त हिन्दुस्तान में अंग्रेजों की हुकूमत थी। एक
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