एक बेहतर भविष्य की ओर
الرسالہ، مارچ ۲۰۲۶، صفحہ ۵۹
का लाड-प्यार एक बड़ा चुनाती हो इस लाड-प्यार का पारिणाम यह होता ह कि बच्चों के मन में प्यार का एक काल्पनिक मापदंड बन जाता है। यह काल्पनिक मापदंड माता-पिता के व्यवहार पर आधारित होता है। धीरे-धीरे यह किसी व्यक्ति के मन में इतना गहराई से बैठ जाता है कि वे इसके ख़िलाफ़ सोच भी नहीं सकते। वे इस मापदंड को पूर्ण सत्य मान लेते हैं, और इसके विपरीत सोचना उनके लिए असंभव हो जाता है। इसका अंतिम परिणाम यह होता है कि व्यक्ति यह समझने लगता है कि केवल मेरे माता-पिता ही मुझसे प्यार करते हैं, माता-पिता के अलावा इस दुनिया में मुझसे प्यार करने वाला कोई नहीं है। प्यार का यह मापदंड व्यक्ति के लिए घातक साबित होता है। इसका नतीजा यह निकलता है कि वह अपने माता-पिता के प्रति अत्यधिक पक्षपाती और सकारात्मक सोच रखता है, जबकि दूसरों के प्रति उसका रवैया बेहद नकारात्मक हो जाता है। वह अपने माता-पिता के बारे में भी सच्चाई से दूर रहता है और दूसरों के बारे में भी वास्तविकता को नज़रअंदाज़ करता है। मनुष्य अपने बचपन का केवल एक छोटा सा हिस्सा अपने माता-पिता के साथ घर में बिताता है। इसके बाद वह बाहर की दुनिया में प्रवेश करता है, एक ऐसी दुनिया में जहाँ चुनौतियाँ हैं, प्रतियोगिता है, और जहाँ कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए अपनी ज़िंदगी को बनाना होता है। ऐसे में, माता-पिता की ओर से अपने बच्चों के प्रति सबसे अच्छी शुभकामना यह
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