अपना देवा के नाम पर बलिदान करने का इरादा किया।
الرسالہ، مئی ۲۰۲۶، صفحہ ۵۴
अपना देवा के नाम पर बलिदान करने का इरादा किया।
ह्वेन त्सांग ने बहुत विरोध किया। उसने कहा कि वह एक बौद्ध साधु है और केवल सत्य की तलाश में निकला है। लेकिन डाकुओं ने उसकी एक न सुनी। ऐसा प्रतीत होने लगा कि अब उसकी मौत यक़ीनी है। उस वक़्त वह नाव में सवार था। आख़िर में वह ख़ामोश हो गया और ध्यान व प्रार्थना में लीन हो गया। जब वह पूरी तरह ध्यान और प्रार्थना में मग्न था, समुद्र में एक भयंकर तूफ़ान उठ खड़ा हुआ। लहरों ने नाव को पूरी तरह घेर लिया। यह दृश्य देखकर डाकू इस क़दर डर गए कि उन्होंने ह्वेन त्सांग को छोड़ दिया और शर्मिंदा होकर उससे माफ़ी माँग्ने लगे। जैसा कि वर्णन किया गया है:
"While he was absorbed in meditation, a violent storm arose that buffeted the boat. The pirates were so terrified that they freed the holy monk and asked for forgiveness and repentance." (8/1126) चीनी यात्री के साथ जो यह वाक़या पेश आया, वह बिल्कुल कुरआन के इस बयान के मुताबिक़ है: