ME AND MAULANA: A PERSONAL RECOLLECTION OF WAHIDUDDIN KHAN - John M. Butt
Al-Risala (English), August-September 2021, p. 186
By Maulana Wahiduddin Khan
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आसान नहीं था मौलाना वहीदुद्ीन बनना! वे इसलाम के पंडितत थे। भारततीयय अध्यातम उनकी अंतर्धारा थी। वे पहले मुसलमान थे और अंतततः भी मुसलमान थे, लेकिन उसी दावे के साथ वे पहले भारततीयय थे और अंतततः भी भारततीयय थे। आसान नहीं होतता है ऐसा संततुलन साधना, लेकिन साधना सब कुछ आसान बना देतती है। इसलिए जो सिर्फ़ मुसलमान थे, उनहें मौलाना वहीदुद्ीन पचतते नहीं थे; जो सिर्फ़ हिंदू थे, उनहें भी मौलाना से ऐसी ही दिक्कतत होतती थी। बाबरी मस्जिद के विधवंस के बाद वे अपनी कोटि के संभवततः पहले मुसलमान थे, जिसने सार्वजनिक रूप से कहा था कि मुसलमानों को अब बाबरी मस्जिद से अपना दावा वापस ले लेना चाहिए और उस ततरफ़ से ख़ामोशी इख़्तिययार कर लेनी चाहिए। मुझे ययह ततजवीज रुचि नहीं थी। मैंने पूछा— “आप मुसलमानों को न्यायय के हक़ में बोलने का अधिकार भी नहीं देंगे?” वे बग़ैर किसी प्रतिक्रियया के बोले— “मैंने किसी को हक़ छोड़ने को नहीं कहा है। ख़ामोश रहना भी बोलना ही है। मुसलमान— पिछले दिनों में जो कुछ हुआ है, उसका ग़म बतताकर ख़ामोशी इख़्तिययार कर लेंगे ततो हिंदुओं के लिए लाज़िमी हो जाएगा कि वे सच व न्यायय की बातत बोलें!” उनहोंने ययह भी कहा कि बाबरी के बाद किसी मंदिर-मस्जिद का सवाल नहीं उठायया जाएगा, ऐसा आश्ासन मिलना चाहिए। मैंने फिर टोका था— “ययह आश्ासन कौन देगा? ययह ततो वे लोग हैं, जो सर्वोचच न्याययालयय को आश्ासन देकर भी छल करने में हिचकतते नहीं हैं। बग़ैर किसी रोष के वे बोले— “नहीं, ययह आश्ासन भर नहीं, संवैधानिक वचन होना चाहिए। लिखितत में हो और न्याययपालिका की मध्यस्थतता में हो।” ऐसा कुछ होना नहीं था और हुआ भी नहीं, लेकिन मौलाना अपनी बातत कहतते रहे। अपनी बातत बेहिचक कहना और कहतते रहना उनकी साधना थी। ऐसा नहीं था कि वे कम बोलतते थे, लेकिन उनके अंदर कोई छलनी लगी थी जिससे छनकर सार भर ही बाहर आतता था। इस ऊँचाई के लोग दूसरों को बहुतत छोटा व ततुचछ मानतते हैं, लेकिन मौलाना इततने ऊँचे आसन से कभी बातत नहीं करतते थे। वे मनुष्य से छोटी भूमिका में मुझे कभी मिले ही नहीं। गांधी जी के सेवाग्ाम आश्रम में शाम की प्रार्थना में वे हमारे साथ बैठे थे। सभी चाहतते थे कि प्रार्थना के बाद वे कुछ कहें। ऐसा होना कोई अनहोनी नहीं थी। ख़ास मेहमानों

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