Al-Risala (English) · ME AND MAULANA: A PERSONAL RECOLLECTION OF WAHIDUDDIN KHAN - John M. Butt

ME AND MAULANA: A PERSONAL RECOLLECTION OF WAHIDUDDIN KHAN - John M. Butt

Al-Risala (English), August-September 2021, p. 188

By Maulana Wahiduddin Khan

Maulana Wahiduddin Khan is named as the default author of the periodical; a piece that carries another writer’s byline is credited to that writer.

मौलाना से एक और अचछी बातत सीखने को मिली, वह ययह कि हमेशा अपने से छोटे और बड़ों से सही अंदाज़ में बातत करें, कभी भी नफ़रतत की बोली न बोलें। मैं रोज़ना मौलाना के लेकचर को सुनतता हूँ, जिससे मुझे प्रतिदिन एक नई बातत सीखने को मिलतती है, जो मेरे प्रतिदिन की कठिनाइययों में मेरे बहुतत काम आतती हैं। 2016 में जब मेरी शादी थी, उस दिन मौलाना से मुझे एक अनमोल ततोहफ़ा मिला। वह ययह कि उनहोंने कहा कि आप ययह सोचें कि आपको उनसे (मेरी पतनी) अचछा जीवनसाथी नहीं मिल सकतता और उनको (मेरी पतनी को) मुझसे अचछा जीवनसाथी नहीं मिल सकतता। उनकी कही ययह बातत आज भी मेरे शादीशुदा जीवन में सही साबितत हो रही है। 2020 में जब मेरा बेटा पैदा हुआ, ब मौलाना ने कहा कि कभी भी अपने बचचे को बहुतत लाड़-प्यार न करें, सिर्फ़ उसके अंदर के पॉटेंशिययल (potential) को जगाना है। मुझे आज भी ययाद है, जब मौलाना हमारे बीच नहीं रहे, उस पूरी रातत को मैं सो न सका। मुझे ऐसे लगतता था, जैसे मेरा कोई बहुतत क़रीबी बिछड़कर चला गयया हो। मुझे आज भी उनकी उपस्थिति उनके कमरे में महसूस होतती है। ऐसी बहुतत सारी बाततें हैं, जो मैंने मौलाना से सीखी हैं और आज भी उनके लेकचर से सीख रहा हूँ और आगे लोगों ततक पहुँचाने की पूरी कोशिश करतता हूँ और करतता रहूँगा। –CPS इंटरनेशनल मेम्बर एक सकारातमक पर्सनालिटी मंजू बोहरा, निज़ामुद्ीन वेसट जब मैं पहली बार मौलाना जी से मिली और उनकी बाततें सुनीं, ततब मेरे अंदर एक सकारातमक (positive) बदलाव आयया। मैं बहुतत सोचतती थी। मेरी सोच

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