Al-Risala (English) · ME AND MAULANA: A PERSONAL RECOLLECTION OF WAHIDUDDIN KHAN - John M. Butt

ME AND MAULANA: A PERSONAL RECOLLECTION OF WAHIDUDDIN KHAN - John M. Butt

Al-Risala (English), August-September 2021, p. 189

By Maulana Wahiduddin Khan

Maulana Wahiduddin Khan is named as the default author of the periodical; a piece that carries another writer’s byline is credited to that writer.

बहुतत नकारातमक (negative) हो गई थी, पर उनसे ततीन बार मिलने के बाद मेरी शख़्सियतत ही बदल गई। वे सबसे बड़े आदर और सममान से मिलतते थे। वे किसी के साथ भी भेदभाव नहीं करतते थे। वे मुश्किल-से-मुश्किल परेशानिययों का हल बड़ी सरलतता से निकालतते थे। मौलाना जी की सोच बहुतत ही सकारातमक थी। मौलाना वहीदुद्ीन ख़ान जी एक विख्यातत इस्लामिक विद्ान और शांति- कार्यकर्ता थे। उनहें दुनियया के 500 सबसे प्रभावशाली मुसलमानों में सूचीबद्ध कियया गयया है। भारतत सरकार की ततरफ़ से उनको ‘पद्मविभूषण’ और ‘पद्मभूषण’ जैसे पुरसकारों से सम्मानितत कियया गयया था। उनहोंने 200 से ज़्या्यादा कितताबें लिखीं, जिनके माध्यम से उनहोंने इसलाम के मानवीययकरण और सर्वधर्म समभाव की भावना का प्रचार कियया। उनहोंने क़ुरआन का हिंदी, अंग्ेज़ी और उर्दू में सरल अनुवाद कियया, तताकि जनमानस क क़ुरआन की उदारवादी बाततों को पहुँचायया जा सके। उनका विचार था कि किसी भी धर्म की जो रूह है, वह समान है— सबकी भलाई करना, लोगों की मदद करना, इंसानियतत, सामाजिक कार्य और ख़ुदा से ाललुक । वे अहिंसा के समर्थक थे। शांतिदूतत के रूप में उनहोंने बहुतत काम कियया। उनहोंने 2001 में ‘सेंटर फ़ॉर पीस एंड स्पिरिचुअलिटी’ की सथापना की। इससे पहले 1976 में उनहोंने दिलली में ‘इस्लामिक सेंटर’ की सथापना की थी। मन मानतता ही नहीं कि वे अब हमारे बीच नहीं हैं। मौलाना जी अपनी कितताबों और वीडिययो के माध्यम से हमेशा हम सब लोगों के दिलों में रहेंगे और हम सबका मार्गदर्शन करतते रहेंगे।

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