Al-Risala · January 1998 · page 39

دشمن اگر قوی است نگہباں قوی تراست

الرسالہ، جنوری ۱۹۹۸، صفحہ ۳۹

इस्लामिक सेंटर के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना वहीद उद्दीन खान से बातचीत दंगों के लिए अवसरवादी नेता जिम्मेदार अमर उजाला ब्यूरो मुरादाबाद, ९० मार्च। इस्लामिक सेन्टर के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना वहीद उद्दीन खान ने कहा है कि समप्रदायक दंगों से आर्थिक व जन हानि होने के साथ सामाजिक ढांचा भी टूटता है, दंगों की इस प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने अवसरवादी नेताओं का उत्तरदायी ठहराया है। श्री खान ने कहा कि नकारात्मक सोच को खत्म करके सकारात्मक सोच की दिशा में समाज के बहाव को चलाने की आवश्यकता है। साम्प्रदायिकता की समस्या से निपटने के लिए आरोप लगाने की राजनीति को त्यागकर समस्या के समाधान खोजने की तरफ अग्रसर होना होगा। मीडिया की भूमिका की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अधिकांश समाचार पत्र माम्प्रदायिक सद्भाव के लिए कार्य करने वाली संस्थाओं के कार्यों को उतना महत्व नहीं देते जितना कि दिया जाना चाहिए। यहां लाजपत नगर में इस्लामिक सेन्टर के कार्यकर्ता अब्दुल रहमान के निवास पर एक विशेष बातचीत में मौलाना खान ने बताया कि वह पिछले तीस वर्षों से मुस्लिम समाज के बीच सही सोच के प्रचार प्रसार में जुटे हैं। इसके लिए वह तीन भाषाओं हिन्दी, उर्दू व अंग्रेजी में मासिक पत्र अलरिसाला का प्रकाशन कर रहे हैं, जिसमें समाज के ज्वलन्त मुददों पर अपनी सोच रखते हुए विभाजनकारी ताकतों का पर्दाफाश करते रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस्लामिक सेन्टर का उद्देश्य नकारात्मक सोच को खत्म करके सकारात्मक विचार को स्थापित करना है। उनके अनुसार जुलूस निकालने व बड़ी-बड़ी सभाएं करने में इस्लामिक सेन्टर का विश्वास नहीं है, क्योंकि इन तरीकों से धूम-धड़ाका तो किया जा- सकता है, लेकिन लोगों की सोच को नहीं बदला जा सकता। उन्होंने दूसरे सम्प्रदाय के लोगों का अहंकार जगाने को दंगों का मुख्य कारण बताया। उन्होंने ६ दिसम्बर ९२ को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ढहाने की घटना को १९४७ के बाद दूसरी सबसे बड़ी घटना बताते हुए कहा कि इस घटना पर इस्लामिक सन्तर ने उस समय जो सोच रखी थी, उसे आज देश में अमल किया गया है। इस सोच में कहा गया था कि मुसलमान एक मस्जिद को भुला दें और हिन्दू एक के बाद दूसरी मस्जिदों को भुला दें, तभी देश का भला संभव है। मौलाना वहीद उद्दीन खान ने कहा कि बाबरी मस्जिद को 'मिस्टर हिन्दू' ने नहीं, बल्कि 'मिस्टर इगो' ने तोड़ा और मिस्टर हिन्दू को मिस्टर इगो बनाने वाले मुसलमानो के निकम्मे लीडर थे। उन्होंने कहा कि मुस्लिम नेताओं की स्वार्थ परक नीति से शिक्षा के प्रसार को गति नहीं मिल सकी है। अपने संगठन इस्लामिक सेन्टर के ढांचे के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि वह महात्मा गांधी की लोक सेवक संघ की अवधारणा के आधार पर लोचदार सांगठनिक ढांचे में विश्वास रखते हैं। इसलिए संगठन की गतिविधियां बड़े-बड़े आयोजनों के बजाय नुक्कड़ सभाओं व सम्पर्क गोष्ठियों के जरिए देश व देश के बाहर चलाई जाती हैं। देश और धर्म के बीच अन्तर करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म के लिए उदारता व सहिष्णुता की नीति अपनायी जानी चाहिए, लेकिन देशहित के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। देशहित सभी धर्मों व सम्प्रदायों से ऊपर है। 'अल-रिसाला' के मुख्य पम्पादक एवं इस्लामिक सेन्टर के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने विचार व्यक्त किये कि देश में आजादी

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