कुदरत का फ़ैसला
الرسالہ، مارچ ۲۰۲۳، صفحہ ۶۰
लग बाड पर जो बात लिखा हुई है वह फ़ितरी सच्चाई है वही मामला तमाम क़ामी का है जिसका ऐलान अमरीका और कननाडा ने अपने यहां किया है। जीव वैज्ञानिक सच्चाई का तक़ाज़ा है कि हर क़ौम अपने यहां वही अल्फ़ाज़ लिखे जो अमरीका और कननाडा ने अपने यहां लिख रखा है। यही मौजूदा दुनिया में इन्सान का इम्तिहान है। यहां आदमी को अपने आज़ाद इरादे से वही काम करना है जो कुदरत ने लाज़िमी क़ानून के तहत पहले से तय कर दिया है। जो चीज़ कुदरत ने अपनी छुपी हुई क़लम से लिखी है, उसे इन्सान को अपने हाथ से अपनी ज़िन्दगी के सफ़हे पर लिखना है। कुदरत के अपने मनसूबे के तहत जगत की जो स्कीम (scheme of things) है, उसके मुताज़िब हर इंसान को अपनी स्कीम को ढाल लेना चाहिए। क्यों की कुदरत के नक्शे से तालमेल का नाम तामीर और सृजन है और कुदरत के नक्शे से तालमेल न करने का नाम नाकामी और बर्बादी। मुजरिम कौन एक आदमी को गुलाब का फूल तोड़ना था। वह शौक के तहत तेज़ी से लपक कर उसके पास पहुंचा और झटके के साथ एक फूल तोड़ लिया। फूल तो उसके हाथ में आ गया, लेकिन तेज़ी के नतीजे में कई कांटे उसके हाथ में चुभ चुके थे। उसके साथी ने कहा कि तुमने बड़ी हिमाक़त की, तुमको चाहिए था कि कांटे से बचते हुए एहतियात के साथ फूल तोड़ो। तुमने एहतियात वाला काम बेएहतियाती से किया। इसी का नतीजा है कि तुम्हारा हाथ ज़ख्मी हो गया।
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