Al-Risala · March 2023 · page 62

कुदरत का फ़ैसला

الرسالہ، مارچ ۲۰۲۳، صفحہ ۶۲

प्रभावो का दख़ रह हत ह, जा सितारा से निकल कर कराड़ा साल के बाद हमारा आंखों तक पहुंचे हैं। यही तमाम चीज़ों का हाल है। इस दुनिया की हर चीज़ जिसको इन्सान ‘देख’ रहा है, वह सिर्फ़ अप्रत्यक्ष तौर पर उसे देख रहा है। सीधे तौर पर इन्सान किसी चीज़ को नहीं देखता; और न अपनी मौजूदा सीमाओं के रहते हुए वह उसे देख सकता है। फिर जब दूसरी तमाम चीज़ों के वजूद को अप्रत्यक्ष दलील की बुनियाद पर माना जाता है तो ख़ुदा के वजूद को अप्रत्यक्ष और बिलवास्ता दलील की बुनियाद पर क्यों न माना जाए? हक़ीक़त यह है कि ख़ुदा उतना ही साबितशुदा है, जितनी इस दुनिया की कोई दूसरी चीज़। इस दुनिया की हर चीज़ अप्रत्यक्ष दलील से साबित होती है। इस दुनिया में हर चीज़ अपने प्रभाव से पहचानी जाती है। ठीक यही हालत ख़ुदा के वजूद की भी है। ख़ुदा यक़ीनन सीधे तौर पर हमारी आंखों को दिखाई नहीं देता, मगर ख़ुदा अपनी निशानियों के ज़रिए यक़ीनन दिखाई देता है। और बेशक ख़ुदा के इल्मी सबूत के लिए यही काफ़ी है। इन्तिक़ाम नहीं किसी ने कहा है - “इन्तिक़ाम लेने से पहले सोच लो कि इन्तिक़ाम का भी इन्तिक़ाम लिया जाएगा।” यह ज़िन्दगी की निहायत गहरी हक़ीक़त है। और इस हक़ीक़त को समझने के बाद ही कोई शख़्स मौजूदा दुनिया में अपनी ज़िन्दगी को कामयाब बना सकता है।

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