Al-Risala · March 2023 · page 63

कुदरत का फ़ैसला

الرسالہ، مارچ ۲۰۲۳، صفحہ ۶۳

यक़ीनन ऐसा ही होगा। और फिर बुराई का एक चक्कर चल पड़ेगा। आपका एक तकलीफ़ के बाद दूसरी तकलीफ़ सहनी पड़ेगी। इसलिए अक़लमन्दी यह है कि नज़रअन्दाज़ करने का तरीक़ा इख़्तियार करके बात को पहले ही मरहले में ख़त्म कर दिया जाए। मेरी मुलाक़ात एक बार उत्तर प्रदेश के एक शख़्स से हुई। उसने एक नेता की साझेदारी में एक बस ख़रीदी। उस आदमी ने पैसा लगाया और नेता ने लाइसेंस हासिल किया। लाइसेंस क़ानूनी तौर पर नेता के नाम था। मगर फ़ायदे में दोनों बराबर के हिस्सेदार थे। कुछ दिनों के बाद नेता की नियत ख़राब हो गयी। उसने सोचा कि क़ानूनी तौर पर गाड़ी मेरी है, क्योंकि लाइसेंस मेरे नाम है। फिर मैं उसका फ़ायदा दूसरों को क्यों दूं। उसने एकतरफ़ा तौर पर गाड़ी पर क़ब्ज़ा कर लिया। अब आदमी बहुत गुस्सा हुआ। उसके अन्दर इन्तिक्राम की आग भड़क उठी। उसने इरादा किया कि नेता को क़त्ल कर डाले। वह उसके क़त्ल का मन्सूबा बनाने लगा। इस दौरान उसकी मुलाक़ात एक बूढ़े तजुर्बेकार आदमी से हुई। पूरा हाल सुनने के बाद बूढ़े आदमी ने कहा कि अगर तुम अपने मन्सूबे के मुताल्बिक़ नेता को मार डालो तो उसके बाद उसके बच्चे क्या तुम को जिन्दा छोड़ देंगे? यह बात आदमी की समझ में आ गई। उसने नेता के क़त्ल का इरादा छोड़ दिया। इसके बजाय उसने यह किया कि उसके पास जो रक़म अब भी बाक़ी थी उससे छोटे पैमाने पर कारोबार शुरू कर दिया। चन्द साल बाद जब उस आदमी से मेरी

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