Al-Risala · March 2023 · page 65

कुदरत का फ़ैसला

الرسالہ، مارچ ۲۰۲۳، صفحہ ۶۵

लाकन यहा वक़्त और यहा रक़म किसी पॉज़िटिव चीज़ को हासिल करन में लगा दी जाए तो वह फ़ायदे के साथ आदमी की तरफ़ लौटती है। जैसा कि उपरोक्त आदमी के साथ हुआ। इन्तिक्राम लेने में ताकत को ख़र्च करना ताक़त को खोना है, और एक पोजिटिव काम में ताक़त लगाना, ताक़त को और भी इज़ाफ़े के साथ दोबारा पा लेना है। ऐसी हालत में यह समझना मुश्किल नहीं कि अक़्लमन्द आदमी को दोनों में कौन-सा तरीक़ा इख़्तियार करना चाहिए। मौंत की ख़बर रोज़ाना अख़बारों में जो ख़बरें होती हैं उनमें से एक मुस्तक़िल ख़बर वह है, जिसको मौत का कॉलम (Obituary) कहा जाता है। ये ख़ुशहाल घरानों की मौत की घटनाएं हैं। मरने वाले की तस्वीर के साथ उसकी मौत की ख़बर होती है और फिर बताया जाता है कि फ़लां तारीख़ को फ़लां जगह पर उनकी आख़िरी रस्में अदा होंगी, दोस्त और रिश्तेदार वहां आकर दिवंगत की आख़िरी रस्मों में शामिल हों। 15 सितम्बर 1990 के अख़बार से दो मिसालें लीजिए। टाइम्स आफ इंडिया के आख़िरी पेज पर इसी क़िस्म की एक सचित्र ख़बर है। उसके शब्द ये हैं – रमेश गोयल का, जो कि एक बेहतरीन आदमी थे, बिल्कुल जवानी की उम्र में अचानक अमरीका में देहान्त हो गयाः Ramesh Goel, a good man has died suddenly at a very young age in U.S.A.

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