Al-Risala · July 2023 · page 6

ख़ुदा का सबूत

الرسالہ، جولائی ۲۰۲۳، صفحہ ۶

साबित होता है कि दुआ ऐसी चीज़ है जो पत्थर की चट्टान को भी अपना जगह से खिसका देती है। पर यह वह दुआ नहीं है जो मुंह से सिर्फ शब्दों के रूप में निकलती है और आदमी की वास्तविक ज़िन्दगी से उसका कोई ताल्लुक नहीं होता। उपरोक्त मिसाल बताती है कि दुआ से चट्टान खिसकाना उन लोगों के लिए संभव होता है जो अपने आपको पूरी तरह ख़ुदा के हवाले कर दें, जो पूरी तरह ख़ुदा को अपने ऊपर संरक्षक बना लें। यहां तक कि भूख की मार और बीवी बच्चों की मुहब्बत भी उनको ख़ुदा की पसंदीदा राह से न हटा सके। बेहद नाजुक और भावुक घड़ियों में भी ख़ुदा की याद दिलाना उनको चौंका देने के लिए काफ़ी हो। चिन्ता के क्षणों में भी जब ख़ुदा का नाम लिया जाए तो उनके चलते हुए क़दम रुक जाएं और उनके उठे हुए हाथ अपनी हरकत बन्द कर दें। आख़िरत के हिसाब का अन्देशा उन पर इतना ज़्यादा छाया हो कि एक हक़दार का हक़ चुकाने की ख़ातिर अगर उनको अपनी सारी पूंजी देना पड़े तो इससे भी वे हिचकिचाएं नहीं। एक आदमी अगर अपना हक मांगने के लिए खड़ा हो जाए तो वे फ़ौरन उसको मान लें, चाहे मांग करने वाला कितना ही कमज़ोर हो और उसके मुकाबले में उनको कितनी ही ज़्यादा ताक़त हासिल हो। ख़ुदा के बन्दे वे हैं जो अपनी वासनाओं और इच्छाओं को कुचल कर और अपने फ़ायदों की बलि देकर ख़ुदा को अपनाते हैं। और जो लोग इस तरह ख़ुदा को अपना

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