ख़ुदा का सबूत
الرسالہ، جولائی ۲۰۲۳، صفحہ ۸
का लफ्ज़ देना चाहूंगा। इसका मतलब यह है कि आपका तमाम वचारिक और जेहनी ताकतें आपके मक़सद में पूरी तरह लग जाएं। आपका सोचना, आपका मुहब्बत करना, आपका नफ़रत करना, सब कुछ आपके मक़सद के साथ बावस्ता हो गया हो। आपकी कोई चीज़ दूसरी तरफ़ बिखरी हुई न हो। जूता बनाने वालों के यहां आपने देखा होगा, काम करते-करते उनके पास बहुत-सी कीलें फैल जाती हैं। उस वक़्त वे यह करते हैं कि चुम्बक का एक टुकड़ा लेकर वहां फेरते हैं, जिससे तमाम बिखरी हुई कीलें खिंच खिंच कर उससे चिमट जाती हैं और फिर वे उसे उठा कर ख़ाने में रख लेते हैं। इस मिसाल में अगर चुम्बक की जगह आप अपने मक़सद को रखें और कीलों के बजाए अपनी सोच, खयालात और जज़्बात और एहसासात को रखें तो ज़िन्दगी और मक़सद के बीच ताल्लुक को आप समझ सकते हैं। इसका मतलब यह है कि चुम्बक के आसपास लोहे के टुकड़े जिस तरह एक-एक करके इकट्ठा हो जाते हैं और आसपास का कोई टुकड़ा ऐसा नहीं होता, जो उससे चिमट न गया हो, इसी तरह आदमी के मक़सद के आसपास उसके सारे दिल और सारे दिमाग को इकट्ठा हो जाना चाहिए। यहां एक घटना मुझे याद आती है। एक बार एक साहब मेरे यहां आए। उनको बाज़ार का कुछ काम था। बाज़ार जाकर जब वह लौटे तो उन्होंने एक वाकिया बताया, जिससे मुझे बड़ा सबक़ मिला। वाक़िआ बहुत छोटा-सा है, मगर उसमें हमारे लिए बड़ी नसीहत है। उन्होंने कहा कि मैं एक जगह पहुंचा, जहां सड़क के किनारे बहुत से मोची अपनी-अपनी दुकान लिए बैठे थे। जब मैं उनके पास से गुज़रा तो मैंने देखा
‹ Previous page Next page › Contents of July 2023 All issues