Al-Risala · September 2023 · page 4

एक आज़माइश

الرسالہ، ستمبر ۲۰۲۳، صفحہ ۴

वह स्थित है, जिसके बार म कुरआन हरक का चेतावनी द रहा ह- कहा, क्या मैं तुमको आगाह करूं कि अपने कर्मों के लिहाज़ से सबसे ज़्यादा घाटे में कौन हैं। वे लोग जिनकी कोशिश दुनिया की ज़िन्दगी में अकारथ हो गई। और वे समझते रहे कि वे बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। (अल-कहफ़)। इस इम्तिहान से बचने का एकमात्र ज़रिया अपने आपको जांचना (आत्मविश्लेषण) है। यानी अपने स्वभाव को कसौटी न समझना, बल्कि कुरआन और सुन्नत को दीन की कसौटी बना कर अपने आपको उस पर जांचते रहना। एक आयत रज़ीन ने ज़ैद बिन असलम से रिवायत किया है। वह कहते हैं कि दूसरे ख़लीफ़ा हज़रत उमर बिन खत्ताब रज़ियल्लाहु अन्हु ने एक रोज़ पानी मांगा। उनके पास एक प्याले में पानी लाया गया, जिसमें शहद मिला हुआ था। हज़रत उमर ने कहा कि यह अच्छा है। मगर मुझे कुरआन की आयत (अल-अहकाफ़ 20) याद आती है जिसमें बताया गया है कि क़ियामत में कुछ लोगों से कहा जाएगा कि तुम अपनी अच्छी चीजें दुनिया में ले चुके। अब आख़िरत की अच्छी चीज़ों में तुम्हारा कोई हिस्सा नहीं। मुझे डर है कि यह वही न हो। हज़रत उमर ने कहा और प्याला पिए बग़ैर वापस कर दिया। ऊपर वाली आयत के तहत अक्सर 'तफ़्सीरों में इस तरह के वाक़ियात दर्ज

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