Al-Risala · November 2023 · page 2

عورت کا میدانِ کار

الرسالہ، نومبر ۲۰۲۳، صفحہ ۲

शख़्स बड़ा कामयाबी हासिल करता है जो अपना पूरा कुव्वत का एक काम में लगा दे। आदमी की परख अल्लामा इब्ने कयिम (691-751 हि.) ने अपनी किताब तरीकुल हिजरतेन में एक वाकिया इस तरह लिखा है:

हज़रत सुहैैल बिन सद कहते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सूरः मुहम्मद की यह आयत तिलावत फ़रमाई, “क्या ये लोग कुरआन में गौर नहीं करते या दिलों पर उनके ताले लगे हुए हैं।” उस वक़्त रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास एक लड़का बैठा हुआ था। उसने आयत सुन कर कहा, “हां, ख़ुदा की क़सम, ऐ अल्लाह के रसूल, बेशक दिल पर उसके ताले हैं। और उनको कोई नहीं खोल सकता, सिवा उसके जिसने उसको लगाया है।” फिर जब हज़रत उमर बिन ख़त्ताब खलीफा हुए तो उन्होंने उस लड़के को बुलाया, ताकि उसको किसी काम पर लगाएं और उन्होंने कहा, “लड़के ने यह जो बात कही वह अक्ल से कही।” जो लोग सामूहिक मामलों के ज़िम्मेदार हों, उनके लिए व्यक्तियों की बेहद अहमियत होती है। किसी संस्था या किसी सामूहिक काम के बेहतर ढंग से पूरा होने में यही व्यक्ति काम आते है। ऐसे लोग हमेशा समाज में मौजूद रहते

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