Al-Risala · January 2023 · page 64

अल्लाह की याद सबसे बड़ी इबादत

الرسالہ، جنوری ۲۰۲۳، صفحہ ۶۴

भी ख़ुदा की अदालत में जाँच की ठीक उसी सतह पर खड़ा हुई है, जहाँ दूसरा ग़ैर-मुस्लिम क़ौमें खड़ी हुई हैं:

जो लोग मुसलमान हुए और जो लोग यहूदी हुए और नसारा (ईसाई) और साबी, इनमें से जो शख़्स ईमान लाया अल्लाह पर और आख़िरत के दिन पर और उसने नेक काम किया तो उसके लिए उसके रब के पास अज्र (प्रतिफल) है। और उनके लिए न कोई डर है और न वे ग़मगीन होंगे। (2:62)

जब तक अल्लाह की यह सुन्नत (तरीक़ा) बाक़ी है, यह संभावना भी बाक़ी रहेगी कि कोई अगर क़ुरआन और इस्लाम का नाम ले और अमली तौर पर इस तरह रहे जैसे क़ुरआन और इस्लाम से उसका कोई ताल्लुक़ नहीं, यहां तक कि हदीस से मालूम होता है कि यह आज़ादी यहां तक है कि एक शख़्स क़ुरआन के आलिम और मुफ़स्सिर की हैसियत से नुमायां हो, दुनिया की ज़िन्दगी में वह ख़ुदा के दीन का चैम्पियन बने, मगर हक़ीक़त में उसकी कोई दीनी क़ीमत न हो, वह आख़िरत में उन लोगों के साथ धकेल दिया जाए जिन्होंने क़ुरआन को सिरे से माना ही न था, जिनका दीन-इस्लाम से कोई ताल्लुक़ न था। क़ुरआन नसीहत के लिए है, न कि केवल तिलावत के लिए इमाम अहमद ने हज़रत आयशा की रिवायत नक़्ल की है कि उनको बताया गया कि कुछ लोग रात को क़ुरआन पढ़ते हैं और रात भर में सारा क़ुरआन एक बार या दो बार में पढ़ लेते हैं। उन्होंने कहा कि उन लोगों ने पढ़ा और उन्होंने नहीं पढ़ा। मैं रसूलुल्लाहु सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ सारी रात खड़ी रहती। आप सूरह बक़रह, सूरह आल इमरान और सूरह अल-निसा पढ़ते। जब भी आप किसी ऐसी आयत से गुज़रते जिसमें अल्लाह से डराया गया है तो आप ज़रूर अल्लाह

‹ Previous page Next page › Contents of January 2023 All issues

Printed page