अल्लाह की याद सबसे बड़ी इबादत
الرسالہ، جنوری ۲۰۲۳، صفحہ ۶۵
बयान कर दिया जाए, तब भी वह उसका क़बूल नहीं करेगा। मसलन हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम का ज़िक्र करते हुए बताया गया है कि उन्होंने अपनी क़ौम के सामने सच्चाई को पूरी तरह खोल कर रख दिया, इसके बावजूद वे लोग मानने के लिए तैयार नहीं हुए। आख़िर में वे अपनी क़ौम से निकल गए और कहा कि ऐ मेरी क़ौम, मैंने तुमको अपने रब का पैग़ाम पहुंचा दिया और मैंने तुम्हारा भला चाहा। पर तुम भला चाहने वालों को पसन्द नहीं करते (7:79)। दूसरी जगह अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि मैं अपनी निशानियों से उन लोगों को फेर दूंगा जो ज़मीन में नाहक़ घमंड करते हैं। और वे हर क़िस्म की निशानियां देख लें तब भी वे उन पर ईमान न लाएं (उनका हाल यह है कि) अगर वे हिदायत का रास्ता देख लें तो उसको वे नहीं अपनाएंगे। और अगर वे गुमराह-- का रास्ता देखें तो उसको वे अपना लेंगे। इसकी वजह यह है कि उन्होंने हमारी निशानियों को झुठलाया और उनको अनदेखा किया (7:146)। इन दोनों आयतों में ऐसे गिरोहों का ज़िक्र है जिनको ख़ुदा के पैग़म्बर के ज़रिए बेहतरीन शक्ल में दावत पहुंची। उसके बावजूद उन्होंने हक़ की दावत को क़बूल नहीं किया। इस की वजह क्या थी। इसकी वजह उनकी बिगड़ी हुई मानसिकता थी। मानसिकता का यह बिगाड़ अक्सर हालात में घमंड की बुनियाद पर होता है। इसलिए उपरोक्त दोनों आयतों में घमंड सबब बताया गया है (7: 75, 146)। नसीहत हर इन्सान के लिए नापसन्दीदा चीज़ है। और ख़ास तौर पर घमंडी इन्सान तो नसीहत को बिल्कुल नापसन्द करता है। जो लोग घमंड की मानसिकता रखते हैं वे कभी अपने ख़िलाफ़ किसी नसीहत को सुनने पर राज़ी नहीं होते। ऐसी कोई सच्चाई उनके लिए आख़िरी हद तक अस्वीकार्य होती है, जिसमें उन्हें अपनी शख़्सियत का निषेध दिखाई दे रहा हो। जो लोग अपने आपको ऊंचे मुक़ाम पर बैठा हुआ मान लें वे किसी ऐसी दावत
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