रिवाजी ज़ेहन
الرسالہ، مارچ ۲۰۲۴، صفحہ ۲
का हिम्मत रखत हा। इस दुनिया में ग़लती करने वाला ही सही काम करता है जिसको यह डर लगा हुआ है कि कहीं उससे ग़लती न हो जाए वह ज़िन्दगी की दौड़ में पीछे रह जाएगा। उसके लिए आगे की मंज़िल पर पहुंचना मुक़द्दर नहीं।
रिवाजी ज़ेहन
एलियस हॉव (Elias Howe) अमरीका के मशहूर शहर का एक मामूली कारीगर था। वह 1819 में पैदा हुआ और सिर्फ़ 48 साल की उम्र में 1867 में उसकी मृत्यु हुई। मगर उसने दुनिया को एक ऐसी चीज़ दी जिसने कपड़े तैयार करने में एक इन्क़िलाब पैदा कर दिया। यह सिलाई की मशीन थी जो उसने 1845 में ईजाद की। एलियस हॉव ने जो मशीन बनाई उसकी सुई में धागा डालने के लिए शुरू में सुई की जड़ की तरफ़ छेद होता था जैसा कि आमतौर पर हाथ की सुइयों में होता है। हज़ारों बरस से इंसान सुई की जड़ में छेद करता आ रहा था। इसलिए एलियस हॉव ने जब सिलाई मशीन तैयार की तो उसमें भी उसने आम रिवाज के मुताबिक़ जड़ की तरफ़ छेद बनाया। उसकी वजह से उसकी मशीन ठीक काम नहीं करती थी। शुरू में वह अपनी मशीन से सिर्फ़ जूता सी सकता था। कपड़े की सिलाई इस मशीन पर मुमकिन न थी। एलियस हॉव एक अर्से तक इसी उधेड़बुन में रहा मगर उसकी समझ में इसका कोई
‹ Previous page Next page › Contents of March 2024 All issues