Al-Risala · July 2024 · page 2
ایک رجل سعید کا انتقال
الرسالہ، جولائی ۲۰۲۴، صفحہ ۲
जा सकता। और फ़िरक़ावाराना मल-मिलाप के लिए आज़माई हुई तदबार सिर्फ़ एक है और वही है जिसको रवादारी कहा जाता है। ज़ाती इख़्तिलाफ़ और मतभेद को गवारा करते हुए मुत्तहिदा (एकताप पूर्ण) ज़िन्दगी गुज़ारना। स्वाभाविक सज्दा इस पृष्ठ के नीचे एक तस्वीर दी जा रही है। इसमें एक आदमी 'सज्दे' की हालत में दिखाई देता है लेकिन यह मस्जिद का या नमाज़ का सज्दा नहीं है, बल्कि मानव स्वभाव का सज्दा है। यह भारतीय संसद के नए सदस्य सुभाष चन्द्र नायक हैं। 9 जुलाई 1991 को जब वह पहली बार पार्लियामेंट हाउस पहुंचे तो उसकी सीढ़ियों पर चढ़ते हुए उनके अन्दर ग़ैरमामूली तौर पर सम्मान का भाव उभरा और वह अनायास पार्लियामेंट के सामने 'सज्दे' की मुद्रा में गिर पड़े।
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