Al-Risala · September 2024 · page 9

ख़ुदा की हिफ़ाज़त में

الرسالہ، ستمبر ۲۰۲۴، صفحہ ۹

जिस हा दूसर शख्श की नाक से टकरान का हद शुरू हो वहा हाथ हिलान वाल की आज़ादी की हद भी ख़त्म हो जाती है।

ख़ुदा की हिफ़ाज़त में

इस्लाम दीने-महफ़ूज़ है, यानी एक सुरक्षित धर्म है। मुसलमान इस दीने-महफ़ूज़ के मानने वाले हैं। मुसलमानों की इस हैसियत ने उनको भी एक महफ़ूज़ और सुरक्षित गिरोह बना दिया है। जिस तरह इस्लाम को मिटाना मुमकिन नहीं उसी तरह मुसलमानों को मिटाना भी मुमकिन नहीं। इस्लाम और मुसलमानों के लिए ख़ुदा की यह हिफ़ाज़त जारी रहेगी, यहां तक कि क़ियामत आ जाए। मुस्लिम उम्मत के साथ ख़ुदा के इस मामले का इज़हार बार-बार हुआ है। पहले दौर में मक्का में मुसलमानों के ठहरने को नामुमकिन बना दिया गया। ठीक उसी वक़्त मदीना के रूप में अल्लाह ने मुसलमानों के लिए एक ताक़तवर मर्कज़ फ़राहम कर दिया। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की वफ़ात के बाद अरब क़बीलों में आम बग़ावत पैदा हो गई, जिसको तारीख़ में ‘फ़ितना-ए-इर्तिदाद’ यानी धर्म से फिर जाने का फ़ितना कहा जाता है। मगर अल्लाह ने अपनी ख़ास मदद से फ़ितने और बुराई के पैदा होते ही उसको ख़त्म कर दिया। ख़िलाफ़ते राशिदा के ज़माने में रोमी साम्राज्य और ईरानी साम्राज्य ने मुसलमानों को ख़त्म करना चाहा मगर अल्लाह की मदद से मुसलमान ख़ुद उन साम्राज्य को ख़त्म करने में कामयाब

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