Al-Risala · September 2024 · page 11

ख़ुदा की हिफ़ाज़त में

الرسالہ، ستمبر ۲۰۲۴، صفحہ ۱۱

आधुनिक अथवतन्त्र में अपना जगह न बना सका ऐसा लगा कि व आज के ज़माने के शूद्र और प्रददलित बन कर रह जाएंगे। मगर ऐन वक़्त पर तेल का ख़जाना ज़ाहिर हुआ। मुस्लिम मुल्कों की ज़मीन के नीचे अल्लाह तआला ने दुनिया के तेल के ज़ख़ीरों का 50 फ़ीसद से भी ज़्यादा हिस्सा रख दिया। इस कुदरती ख़ज़ाने ने मुसलमानों के आर्थिक पिछड़ेपन की भरपाई कर दी। क़यामत में ऐसे हक़ायक़ और तथ्य छिपे हुए थे जो क़ुरआन के ख़ुदा की किताब होने की पुष्टि करने वाले थे। मगर मुस्लिम लीडर अपने झूठे कामों की वजह से सृष्टि और कायनात की सच्चाई की खोज में न लग सके। अल्लाह तआला ने यह काम पश्चिमी क़ौमों से लिया। उन्होंने प्रकृति और फ़ितरत की सच्चाइयों को खोज निकाल कर इस बात की व्यावहारिक व्याख्या जुटा दी कि हम उनको ज़मीन और आसमान और प्रकृति में अपनी निशानियां दिखाएंगे ताकि उन पर यह खुल जाए कि यह हक़ (सत्य) है (क़ुरआन, 41:53)। अल्लाह तआला को इस दीन की आवाज़ पूरी ज़मीन के हर छोटे और बड़े घर में पहुंचानी थी (मुसनद अहमद, हदीस संख्या 23814), इसलिए अल्लाह ने फ़ितरत और प्रकृति में यातायात और संचार के साधन छिपा रखे थे। मगर मुस्लिम अल्लाह तआला ने दूसरी क़ौमों को इस खोज में लगा दिया। यहां तक कि वे तमाम प्रचार-प्रसार के साधन वजूद में आ गए, जिनको प्रिंट मीडिया

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