ख़ुदा की हिफ़ाज़त में
الرسالہ، ستمبر ۲۰۲۴، صفحہ ۱۳
गांधी जी ने एक बार अपने अख़बार ‘हरिजन’ में लिखा था कि सादगी कांग्रेसियों ही की विरासत नहीं। मैं राम और कृष्ण का हवाला नहीं देता, क्योंकि वे ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं थे। मैं मजबूर हूं कि अबू बक्र और उमर नाम का उल्लेख करूं। हालांकि वे बहुत बड़ी सल्तनत के शासक थे, पर उन्होंने फकीरों जैसी ज़िन्दगी गुज़ारी। Simplicity is not the monopoly of Congresses. I am not going to mention the names of Rama and Krishna because they were not historic personalities. I am compelled to mention the names of Abu Bakr and Umar. Though they were masters of vast empires, yet they lived the life of paupers. (Harijan, July 27, 1937) यह एक सच्चाई है कि इस्लामी शख्सियतों ने इस्लाम के रूप में जो इतिहास बनाया है, वह सारी मानवता के लिए नमूने का इतिहास है। इस्लाम ने उन खूबियों की ऊंची मिसाल क़ायम की है, जिनको इन्सानी खूबियां कहा जाता है। काल्पनिक क़िस्से-कहानियों के रूप में कोई भी व्यक्ति एक किताब लिख सकता है, पर इन्सानियत के नमूने के लिए यथार्थ चरित्र का उल्लेख करना हो तो इस्लामी शख्सियतों के सिवा किसी और का हवाला नहीं दिया जा सकता। इस लिहाज़ से ये इस्लामी शख्सियतें पूरी इन्सानियत की साझा नैतिक विरासत
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