ख़ुदा की हिफ़ाज़त में
الرسالہ، ستمبر ۲۰۲۴، صفحہ ۱۴
आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले उसन अपन पत्र म लिखा थाः “मैं अपनी ज़िन्दगी को ख़त्म कर रहा हूं, क्योंकि शायद मैं ऐसी दुनिया में भटक आया जिसके लिए मैं पैदा नहीं किया गया था।” कमी का यह अहसास ऐसे बहुत से लोगों का पीछा किए रहता है, जो प्राकृतिक रूप से ग़ैर-मामूली ज़ेहन लेकर पैदा हुए हों। वे या तो घोर निराशा और असफलता की ज़िन्दगी गुज़ार कर मरते हैं या आत्महत्या कर लेते हैं। कम बुद्धि और कम प्रतिभा रखने वालों में ऐसे लोग काफ़ी मिल जाएंगे जो प्रत्यक्षतः संतुष्ट जीवन जीते हों, पर ज़्यादा प्रतिभाशाली लोगों में मुश्किल ही से कोई शख़्स मिलेगा, जो संतुष्ट जीवन हासिल करने में सफल हुआ हो। इसकी वजह इन्सान का आदर्शवाद है। हर इन्सान स्वाभाविक तौर पर आइडियल (आदर्श) की तलाश में है। पर मौजूदा दुनिया में आइडियल को पाना इतना कठिन मालूम होता है कि कहावत बन गई है कि आदर्श कभी हासिल नहीं किया जा सकताः Ideal cannot be achieved. अब होता यह है कि कम बुद्धि रखने वालों में चूंकि चेतना बहुत ज़्यादा जागृत नहीं होती, वे आइडियल और ग़ैर-आइडियल के बीच बहुत ज़्यादा फ़र्क़ नहीं
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