मेयार को बुलन्द करना
الرسالہ، نومبر ۲۰۲۴، صفحہ ۱۴
वाल के बारे में और ज़्यादा जानकारी हासिल करने के ख़ुद खाजबान करत थे। वे आपसे मिलते और क़ुरआन को पढ़ते-सुनते। इस तरह विरोध का यह नतीजा हुआ कि आपका पैग़ाम दूर-दूर तक पहुंच गया, जहां आप ख़ुद अभी तक उसको नहीं पहुंचा सके थे। विरोधियों ने आपको बदनाम करके आपके बारे में लोगों के अन्दर खोज-बीन करने का शौक़ पैदा किया। और जब उन लोगों ने सीधे ख़ुद खोज-बीन की तो उनमें से बहुत से लोग आपके पैग़ाम को हक़ व सच्चा पाकर उसके हामी बन गए। इस सूरह में रसूलुल्लाह (स.अ.व.) से कहा गया है कि 'मुश्किल' के 'आसानी' में तब्दील होने के दो तजुर्बे तो तुम कर चुके हो - सच की तलाश की बेचैनी के बाद हिदायत का मिलना, बदनामी की मुहिम से दावत फैलने के नए मौक़े पैदा होना। इसी तरह उस सुन्नते-इलाही का तीसरा पहलू भी जल्द ही तुम्हारे सामने आ जाएगा। हालात की स्वाभाविक रफ़्तार को अपनी हद तक पहुंचाने दो और भविष्य के उजागर होने तक सब्र के साथ उसका इंतज़ार करो। इस तीसरे दौर का मतलब पैग़ाम और पैग़ाम पेश करने वाले का शुरुआती दौर से निकल कर मुसल्लमा (सम्पूर्ण) दौर में दाख़िल होना है। जिसको सूरह नस्त्र में 'फ़तह' कहा गया है। मौजूदा शुरुआती दौर में जो सख़्त हालात पेश आ रहे हैं, वे आने वाली 'आसानी' की भूमिका हैं। इस तरह वे तमाम ज़रूरी कारक (फ़ैक्टर) जमा किए जा रहे हैं कि आइन्दा जब ठहराव का चरण आए तो वह सही माइनों में ठहराव और स्थायित्व बन सके।
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