بندہ شدن از بندگان عبید بیاموز
الرسالہ، جنوری ۲۰۲۴، صفحہ ۱
सुफ़ियान का बाबा हिन्द बिन्त उत्बा था। यह वह औरत है, जिसन उहुद का जंग में हज़रत हमज़ा की लाश की बेहुरमती की थी। वह कई औरतों के साथ आई। उसने कहा कि अगर मैं मुहम्मद (स.) के सामने बोली तो वह मुझे पहचान लेंगे, और अगर उन्होंने पहचान लिया तो वह मुझे क़त्ल कर देंगे। बैअत (दीक्षा) के वक़्त हिन्द ने नक़ाब से अपना चेहरा छिपा लिया। मगर वह ऊंचे ख़ानदान की औरत थी, इसलिए वह अपनी बड़ाई के अहसास से चुप न रह सकी। बैअत के अल्फाज़ अदा करते हुए जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने औरतों से फ़रमाया कि यूं कहो कि हम अपनी औलाद को क़त्ल न करेंगे, तो हिन्द ने बेबदाश्त होकर गुस्ताख़ी के अल्फाज़ कहे। उसके अल्फाज़ अलग-अलग रिवायतों में इस तरह नक़्ल किए गए हैं: • हिन्द ने कहा कि आपने उनको बद्र के दिन क़त्ल कर दिया इसलिए आप जानें और वे जानें। • हमने छोटे पर उन्हें पाला और बड़े पर आपने उन्हें क़त्ल कर दिया। • आप ख़ुद तो उनके बापों को क़त्ल करते हैं और हमको उनकी औलाद के बारे में नसीहत कर रहे हैं। हिन्द ने इससे पहले भी बार-बार रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान में गुस्ताख़ी की थी। ऊपर वाले वाक़िए में तो उसने आमने-सामने तौहीने-
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