Al-Risala · January 2024 · page 6

بندہ شدن از بندگان عبید بیاموز

الرسالہ، جنوری ۲۰۲۴، صفحہ ۶

से थे, जिनके ज़रिए अल्लाह न दीन को ताक़त दी (सीरत अल-नबूवत इब्न कसीर, पहला भाग, पेज 446)। हज़रत हम्ज़ा को यह मुक़ाम ऐसे ही नहीं मिल गया, बल्कि वह उनके सच्चे अमल के नतीजे में उन्हें हासिल हुआ। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को जब हुक्म हुआ कि अपने ख़ानदान के क़रीबी लोगों को आगाह करो (अल-शुअरा, 214) तो आपने ख़ास तौर पर हम्ज़ा के सामने दीने-तौहीद पेश किया, मगर उनके ज़ेहन पर बाप-दादा के दीन का इतना असर था कि शुरू में कई साल तक इस्लाम की सच्चाई उनकी समझ में न आ सकी। आख़िरकार नबूवत के छठे साल उन्होंने इस्लाम क़बूल किया। एक रोज़ वह शिकार खेल कर वापस आए। उन के हाथ में लोहे की कमान थी। ठीक उसी वक़्त एक औरत ने आकर उनसे कहा कि अभी मैंने सफ़ा पहाड़ी के पास मुहम्मद को देखा है। वहां अम्र बिन हिशाम (अबू जहल) भी था और वह तुम्हारे भतीजे को गाली दे रहा था और बहुत ज़्यादा बुरा कह रहा था। हम्ज़ा ख़ानदानी ग़ैरत के तहत घर से निकले काबे में उन्होंने अबू जहल को पा लिया। वह अभी तक गुस्से में थे। उन्होंने लोहे की कमान अबू जहल के सिर पर इतने ज़ोर से मारी कि ख़ून निकल आया। उन्होंने अबू जहल से कहा कि तुम मेरे भतीजे के दुश्मन बने हुए हो, तो सुन लो कि मेरा दीन भी वही है जो मुहम्मद का दीन है। अबू जहल का ताल्लुक़ क़बीला बनू मख्जूम से था और हम्ज़ा का ताल्लुक़ क़बीला बनू हिशाम से।

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