Al-Risala · January 2024 · page 7

بندہ شدن از بندگان عبید بیاموز

الرسالہ، جنوری ۲۰۲۴، صفحہ ۷

रहा उन्हें सारी रात नींद नहीं आई। सुबह हुई तो इसी बचना में काबा में गए वहां अल्लाह से उन्होंने दुआ की:

मैंने जो कुछ किया, ऐ अल्लाह, अगर वह हिदायत है तो उसकी तसदीक़ मेरे दिल में डाल दे। वरना मैं जिस में पड़ गया हूं उससे मेरे लिए निकलने की सूरत पैदा कर दे (पेज 446)। इसी के साथ अगले दिन वह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिले। उन्होंने आप से कहा कि मेरे भतीजे, मैं एक मामले में पड़ गया हूं। और उससे निकलने की सूरत मुझे नज़र नहीं आती। मुझे यह भी नहीं मामूल कि यह सही रास्ता है या गुमराही है। इसलिए आप इस मामले में मुझे बताइए। ऐ भतीजे, मैं तुमसे इस मामले में सुनना चाहता हूं। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनको नसीहत की। उन्हें ख़ौफ़ दिलाया और उनको अल्लाह के इनाम की ख़ुशख़बरी दी। इसके बाद अल्लाह ने उनके दिल में यक़ीन डाल दिया। उन्होंने कहा कि मैं गवाही देता हूं कि आप सच्चे हैं। ऐ मेरे भतीजे, अपने दीन का आम ऐलान करो। ख़ुदा की क़सम, अगर मुझे वह सब कुछ दिया जाए जिस पर आसमान ने साया किया है, तब भी मैं इस दीन को नहीं छोडूंगा (पेज 446)। इसके बाद हज़रत हम्ज़ा पूरी तरह आप के साथी बन गए। जाहिलियत (इस्लाम से पहले) के ज़माने में वह एक दौलतमन्द शख़्स थे। इस्लाम में आने के बाद उनकी दौलत ख़त्म हो गई। उन्हें अपने वतन मक्का को छोड़ कर मदीना जाना पड़ा। इस्लाम की ख़ातिर उन्हें अपनी क़ौम से लड़ाई लड़नी पड़ी। यहां तक कि

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