بندہ شدن از بندگان عبید بیاموز
الرسالہ، جنوری ۲۰۲۴، صفحہ ۱۴
चल गए आपन न इसके खिलाफ फ़रियाद की कि आपका आपके साथियों को अपने वतन और अपनी जायदाद को छोड़ना पड़ रहा है और न इसकी परवा की कि इस तरह वतन छोड़ कर जाने की वजह से लोग आप पर बुज़दिली और फ़रार का इलज़ाम लगाएंगे। मदीना चले जाने के बाद मक्का के लोगों ने आपके खिलाफ़ जंग छेड़ दी। उस वक़्त भी आपकी पालिसी यह रही कि जहां तक हो सके जंग से बचा जाए। मिसाल के तौर पर अहज़ाब के मौक़े पर आपने खाई खोद कर अपने और अपने दुश्मनों के बीच आड़ क़ायम कर दी। आपने सिर्फ़ बचाव (डिफेंस) में जंग की और वह भी उस वक़्त जबकि मुठभेड के सिवा कोई और सूरत बाक़ी न रह गई हो। ऐसी बाक़ायदा जंगे सिर्फ़ तीन हैं जिनमें आप ख़ुद शरीक रहे हों (बद्र, उहुद और हुनैन)। आपके ज़माने में मूता की जंग भी हुई मगर उसमें आप ख़ुद शामिल न थे। आपको अरब में जो ताक़त हासिल हुई वह जंग के ज़रिए नहीं हुई। बल्कि उस सुलह के ज़रिए हुई, जिसको कुरआन में फ़तह-मुबीन यानी खुुली-जीत (अल- फ़तह) कहा गया है। सुलह-हुदैबिया का वाक़िआ ग़ैर-ख़ूनी इन्किलाब लाने के लिए अपने आपको ख़ून करने से कम न था। आपने अपनी ज़ात का 'ख़ून' करना गवारा किया ताकि बाहर की दुनिया में ख़ून न बहाया जाए। पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को अरब में जो ताक़त हासिल
‹ Previous page Next page › Contents of January 2024 All issues