اختلاف ایک آزمائش
الرسالہ، مارچ ۲۰۲۵، صفحہ ۲
कमाल-ए-इंसानियत के स्तर पर पहुंचकर इश्वर का ज्ञान (आ'रिफ़ बिल्लाह) प्राप्त करता है। इन तीन चरणों को इस प्रकार वर्णित किया जा सकता है: 1. जन्मजात व्यक्तित्व (Born Personality)
2. विकसित व्यक्तित्व (Developed Personality) 3. ज्ञानी व्यक्तित्व (Realized Personality) जन्मजात व्यक्तित्व ईश्वर का दिया हुआ व्यक्तित्व होता है। इस दृष्टि से सभी मनुष्य समान हैं। क्षमता के मामले में एक व्यक्ति और दूसरे व्यक्ति में हमेशा अंतर होता है, लेकिन संभावित योग्यता (Potential Capacity) के संदर्भ में सभी मनुष्य समान होते हैं। इसी तथ्य को एक हदीस में इस प्रकार व्यक्त किया गया है: “ताक़तवर ईमान वाला ईश्वर के निकट कमजोर ईमान वाले से बेहतर और अधिक प्रिय है, और हर किसी में भलाई है। जो चीज़ तुम्हारे लिए फायदेमंद हो, उसे प्राप्त करने की कोशिश करो और ईश्वर से मदद मांगो, लेकिन हार मत मानो। और अगर तुम्हारे खिलाफ कोई बात पेश आए तो यह न कहो कि काश, मैंने ऐसा और ऐसा किया होता। बल्कि यह कहो कि यह
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