اختلاف ایک آزمائش
الرسالہ، مارچ ۲۰۲۵، صفحہ ۱۱
फ़्रआन आर उसक कमा से छुटकारा द आर मुझ ज़ालिम क़ाम से मुक्ति प्रदान करा" (कुरान, 66:11)
यह दुआ इस्म-ए-आज़म (ईश्वर के सर्वोच्च नाम) के साथ की गई थी, जो उसी समय कबूल कर ली गई। इस घटना से यह सीख मिलती है कि यदि कोई महिला (या पुरुष) आसिया जैसी कुर्बानी का उदाहरण पेश करे, तो उसे इस्म-ए-आज़म के साथ दुआ करने की तौफ़ीक़ (सामर्थ्य) मिलती है और ऐसी दुआ को निश्चित रूप से स्वीकार किया जाता है। हज़रत मरियम, हज़रत मसीह की माँ ऐसी ही एक मिसाल हज़रत मरियम की है, जो पैगंबर हज़रत मसीह (अलैहिस्सलाम) की माँ थीं। उनका समय लगभग ढाई हज़ार साल पहले का है। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी को पूरी तरह से अल्लाह के काम और उसके ज़िक्र व दुआ के लिए समर्पित कर दिया था। इस समर्पण के फलस्वरूप, उन्हें अल्लाह की तरफ़ से यह विशेष इनाम मिला कि उनके लिए ख़ुदाई रिज़क़ (सूरह आले इमरान: 37) आने लगा। 'ख़ुदाई रिज़क़' का क्या मतलब है? यह अल्लाह की तरफ़ से दी जाने वाली आत्मिक खुराक (spiritual food) है। यह दिव्य दृष्टि (Divine Grace) है, जो वह अपने से करीब होने वाले बंदों को देता है। ऐसी महिलाएं (या पुरुष)
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