Al-Risala · March 2025 · page 12

اختلاف ایک آزمائش

الرسالہ، مارچ ۲۰۲۵، صفحہ ۱۲

(सच्चाई और समर्पण) का सबूत दे, जैसा हज़रत मार्यम न दिया था। हज़रत खदीजा बिन्ते ख़ुवैलिड इसी प्रकार की एक और मिसाल हज़रत खदीजा बिन्ते ख़ुवैलिड (वफ़ात: 620 ईस्वी) की है। वे पैगंबर-ए-इस्लाम की पहली पत्नी थीं। उन्हें यह विशेष दर्जा प्राप्त है कि उन्होंने सबसे पहले पैगंबर-ए-इस्लाम के संदेश को कुबूल किया। मक्का का दौर पैगंबर-ए-इस्लाम के लिए अत्यधिक कठिनाई और मुसीबत का दौर था। इस पूरी अवधि में, हज़रत खदीजा ने खुले दिल से उनका साथ दिया। पैगंबर-ए-इस्लाम से निकाह के बाद उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी भी किसी शिकायत का इज़हार नहीं किया। वे हर हाल में सब्र और शुक्र की मिसाल बनी रहीं। रिवायत में आता है कि एक दिन हज़रत जिब्राइल उनके घर आए। पैगंबर-ए- इस्लाम ने जिब्राइल को देखा, लेकिन हज़रत खदीजा ने नहीं देखा। पैगंबर-ए- इस्लाम ने उनसे कहा कि यह जिब्राइल हैं, और वे तुम्हें अल्लाह की तरफ़ से सलाम पहुंचाने आए हैं। हज़रत जिब्राइल ने उन्हें यह खुशखबरी दी कि जन्नत में तुम्हारे लिए एक

‹ Previous page Next page › Contents of March 2025 All issues

Printed page