मेहमान-नवाज़ी या दिखावा
الرسالہ، مئی ۲۰۲۵، صفحہ ۱۳
मज़ूदा दुनिया में व्यक्ति बार-बार यह अनुभव करता है कि जो कुछ वह चाहता है, वह यहाँ मौजूद है, लेकिन इसके बावजूद उसे पूरा प्राप्त नहीं हो पाता। व्यक्ति स्वास्थ्य चाहता है, लेकिन बीमारी, दुर्घटना, और बुढ़ापा उसकी इच्छाओं को नकार देते हैं। व्यक्ति आनंद चाहता है, लेकिन कई प्रयासों के बाद भी जब वह इसे प्राप्त करता है तो उसे पता चलता है कि वह इससे संपूर्ण आनंद नहीं पा सकता। वह ख़ुशियों से भरी हुई ज़िंदगी चाहता है, लेकिन ख़ुशियों के बाग में दाख़िल होकर पाता है कि यह बाग काँटों से भरा हुआ है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इंसान को यहाँ जन्नत का केवल दूर से परिचय दिया जाता है। यहाँ उसे जन्नत की झलक तो दी जाती है, लेकिन यह भी बताया जाता है कि यह उसे इस दुनिया में नहीं मिल सकती। यहाँ उसे जन्नत के लिए प्रयास करने के लिए कहा गया है, ताकि अगले जीवन में उसे जन्नत प्राप्त हो सके। इस दुनिया में उससे कर्म की अपेक्षा की गई है, और इसी के साथ उसे यह भी दिखाया गया है कि यदि उसने कर्म में सफलता पाई, तो वह किस दुनिया में प्रवेश करेगा। मौजूदा दुनिया जन्नत का परिचय है, और अगली दुनिया जन्नत की प्राप्ति का स्थान।
मेहमान-नवाज़ी या दिखावा
आजकल यह आम प्रचलन है कि लोग अपने मेहमानों के खाने-पीने का बहुत ज़्यादा इंतज़ाम करते हैं और इस पर काफी पैसा खर्च करते हैं। अगर उनसे कहा जाए कि यह फ़िज़ूलखर्ची और संसाधनों को व्यर्थ करना है, तो वे कहते हैं कि