दुनिया से भरे हुए और दीन से ख़ाली
الرسالہ، نومبر ۲۰۲۵، صفحہ ۵۱
जाहिलियत (इस्लाम से पहले) के ज़माने में सूदां लेनदेन का मामला चलता था मक्का की फ़त्ह के बाद दोनों ख़ानदान इस्लाम लाए तो उस वक़्त बनू अम्र बिन उमैर ने बनू मुगीरा से अपना बक़ाया सूद मांगा। उसके बाद बनू मुगीरा ने आपस में मश्वरा किया और तय किए गए फ़ैसले के मुताबिक़ कहा कि हम इस्लाम लाने के बाद अपनी इस्लामी कमाई से सूद अदा नहीं करेंगे। इस पर झगड़ा बढ़ा। उस वक़्त मक्का में रसूलुल्लाह (सल्ल०) की तरफ़ से अत्ताब बिन उसैद हाकिम थे। उन्होंने रसूलुल्लाह (सल्ल०) को इसकी ख़बर दी: आपने उसके जवाब में कुरआन की यह आयत लिख कर भेज दी:
"ऐ ईमान वालो, अल्लाह से डरो और जो सूद बाक़ी रह गया है उसे छोड़ दो, अगर तुम ईमान वाले हो। अगर तुम ऐसा नहीं करते तो अल्लाह और उसके रसूल की तरफ़ से लड़ाई के लिए सावधान हो जाओ।" (सूरह अल-बक़रह, 2:278-79)। इस आयत को सुनते ही बनू अम्र बिन उमैर का ज़ेहन बदल गया। उन्होंने कहा: हम अल्लाह की तरफ़ पलटते हैं और बक़ाया सूद को छोड़ते हैं। (तफ़सीर इब्ने कसीर, जिल्द एक, पेज 249)
दुनिया से भरे हुए और दीन से ख़ाली
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