Al-Risala · January 2025 · page 1

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الرسالہ، جنوری ۲۰۲۵، صفحہ ۱

वह बाहर से मिट्टी, पानी और गैस लता है और उन्हें पत्तों, फूलों और फलों की सूरत में सामने लाता है। इसी तरह किसी इंसानी समाज की बेहतरी इस बात पर निर्भर करती है कि उसके तमाम लोग यह सलाहियत रखते हों कि वे छोटे सलूक को ऊंचे सलूक में बदल सकें। इसी तरह इंसान के मानसिक अस्तित्व को भी वैसा ही होना चाहिए जैसा बनाने वाले ने उसके जिस्मानी अस्तित्व को बनाया है। इंसान जो चीजें खाता है, उनमें एक हिस्सा शक्कर (चीनी) का होता है। शक्कर अपनी पहली सूरत में इंसान के लिए बेफायदा होती है, इसलिए इंसान के जिस्म में लबलबा (Pancreas) का निज़ाम मौजूद है, जिसका काम है शक्कर को ताकत (एनर्जी) में बदल देना। इसी तब्दीली की सलाहियत पर इंसान की ताकत और सेहत का दारोमदार है। अगर किसी इंसान के जिस्म का यह निज़ाम खराब हो जाए तो शक्कर ताकत में नहीं बदलेगी, बल्कि खून में शामिल हो जाएगी या पेशाब के रास्ते बाहर आ जाएगी। इसके बाद इंसान बेहद कमजोर हो जाएगा इस तरह वो बीमारी पैदा होती है, जिसे डायबीटीज (diabetes) कहा जाता है। अगर एक इंसान डायबीटीज़ का शिकार हो जाए, यानी उसका जिस्म शक्कर को ताकत में बदलने की सलाहियत खो दे, तो उसकी जिंदगी बेमाने हो जाएगी। वह सब कुछ होने के बावजूद 'कुछ भी नहीं' हो जाएगा। इसी तरह अगर कोई समाज

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