Al-Risala · March 2026 · page 3

एक बेहतर भविष्य की ओर

الرسالہ، مارچ ۲۰۲۶، صفحہ ۳

नही हा यह सिर्फ एक बबुनयाद बात है, जा अघावश्वासी मानसक्ता (superstitious conditioning) के परिणामस्वरूप पैदा हुई है। इसके पीछे कोई वैज्ञानिक या बौद्धिक आधार नहीं है। प्रतीकात्मक कुर्बानी हज़रत इब्राहीम (अलैहिससला्म) ने एक बार ख़्वाब में देखा कि वे अपने बेटे इस्माईल (अलैहिससला्म) को अपने हाथ से ज़िब्ह (कुर्बान) कर रहे हैं। इस ख़्वाब के मुताबिक़, हज़रत इब्राहीम (अलैहिससला्म) अपने बेटे को ज़िब्ह करने के लिए तैयार हो गए। लेकिन यह एक तम्सीली (symbolic) ख़्वाब था, यानी इसका मतलब यह था कि अब ख़ुदाई योजना के मुताबिक़, अपने बेटे को तौहीद के मिशन के लिए समर्पित कर दो, एक ऐसा मिशन जो अरब के बंजर रेगिस्तान में शुरू होने वाला था। कुरआन में हज़रत इब्राहीम (अलैहिससला्म) के इस ख़्वाब का ज़िक्र सूरह नंबर 37 में आया है। इसमें बताया गया है कि जब पैगम्बर इब्राहीम (अलैहिससला्म) ने ख़्वाब के बाद अपने बेटे को कुर्बान करना चाहा, तो उस वक़्त अल्लाह के फ़रिश्ते ने उन्हें बताया कि वे बेटे के बदले में एक मेंढा (दुम्बा) ज़िब्ह कर दें। चुनांचे, हज़रत इब्राहीम (अलैहिससला्म) ने ऐसा ही किया। इस बारे में कुरआन में फ़रमाया गया है: “और हमने एक महान कुर्बानी के बदले उसे छुड़ा लिया।” (अस-साफ़्फ़ात, 37:107)

जैसा कि सहीह अल-बुख़ारी की रिवायत से मालूम होता है, इसके बाद हज़रत इब्राहीम

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