अपना देवा के नाम पर बलिदान करने का इरादा किया।
الرسالہ، مئی ۲۰۲۶، صفحہ ۵۶
का निशाना बन जाता हो। अगर आदमी सब्र और सूझबूझ से काम ल आर मुक़ाबले के पहले ही चरण में प्रतिद्वंद्वी के वार को ख़ाली जाने दे तो बहुत जल्द ऐसा होगा कि प्रतिद्वंद्वी ख़ुद अपनी कार्रवाइयों के नतीजे में अपने को शस्त्रहीन कर चुका होगा। याद रखिए, कोई भी शख़्स जो आपके मुक़ाबले में आता है उसके पास हमेशा 'तीन' ही गोलियां होती है। अनगिनत गोलियां किसी के पास नहीं होतीं। अगर आप यह होशियारी दिखाएं कि मुक़ाबले की शुरूआत में किसी तरह अपने को निशाने से हटा लें तो इसके बाद निश्चित रूप से ऐसा होगा कि दुश्मन अपनी 'तीन गोलियों' को ख़त्म करके ख़ाली हाथ हो चुका होगा। अब ज़्यादा बेहतर तौर पर वह वक़्त आ जाएगा कि आप उसको हर देश और हर मुल्क के मुसलमान भी ऐसा ही करते हैं कर सकें। यह कामयाबी हर प्रतिद्वंद्वी और हर शत्रु के ऊपर हासिल की जा सकती है। बशर्ते कि मुक़ाबले के दौरान आदमी अपने होशोहवास न खोए। ख़ुदा का ज़िक्र क़ैस बिन अभी हाज़िम से روایت है कि हज़रत अब्दुल्लाह बिन रवाहा (रज़ियल्लाहु अन्हु) अपनी बीवी की गोद में सिर रखे हुए थे कि अचानक वे रोने लगे। उनकी बीवी भी उनके साथ रोने लगीं। उन्होंने पूछा, "तुम क्यों रोईं?" बीवी ने कहा, "मैंने आपको रोते देखा तो मैं भी रोने लगी।" अब्दुल्लाह बिन रवाहा ने कहा, "मुझे अल्लाह तआला का यह कथन याद