अपना देवा के नाम पर बलिदान करने का इरादा किया।
الرسالہ، مئی ۲۰۲۶، صفحہ ۵۹
यह है कि मर बाद इतिहास में एक ऐसा दौर आने वाला है जो पूर्ण धार्मिक स्वतंत्रता (religious freedom) का युग होगा। आस्थावान लोग स्वतंत्र होंगे कि वे धरती के जिस हिस्से में चाहें धार्मिक गतिविधियाँ कर सकें, चाहे वह इबादत की गतिविधि हो या दीन की शिक्षा को लोगों तक पहुँचाने की गतिविधि। वर्तमान युग में पैग़म्बर-ए-इस्लाम की यह भविष्यवाणी पूरी तरह सत्य साबित हो चुकी है। आज की दुनिया में आस्थावान लोग हर धार्मिक गतिविधि के लिए स्वतंत्र हैं। अब केवल एक गतिविधि वर्जित है, और वह है धर्म के नाम पर हिंसा। हिंसा का बड़ा रूप युद्ध है और हिंसा का छोटा रूप यह है कि आप दूसरों के लिए समस्या (problem) बन जाएँ। 'पूरी धरती मस्जिद बन जाएगी' का अर्थ यह है कि पूरी धरती और उस पर रहने वाले सभी लोग व्यावहारिक रूप से धर्म के समर्थक (supporter) बन जाएँगे। दुनिया की सभी जातियाँ या तो धर्म की समर्थक बन जाएँगी या कम से कम तटस्थ (indifferent)। इक्कीसवीं सदी व्यावहारिक रूप से इसी प्रकार की सदी है। आज जो लोग नफ़रत और हिंसा में जी रहे हैं, वे यह घोषणा कर रहे हैं कि वे हर दृष्टि से अनभिज्ञ हैं – न तो वे समय की परिस्थितियों से वाक़िफ़ हैं और न ही अपने पैग़म्बर की बताई हुई बातों से।