अपना देवा के नाम पर बलिदान करने का इरादा किया।
الرسالہ، مئی ۲۰۲۶، صفحہ ۶۰
शुरू कर दत ह ताकि जा चीज़ व शांतिपूर्वक हासिल नहा कर सक, उस हिस्सा के ज़रिए हासिल कर लें। असल बात यह है कि संतोष से इंसान के अंदर शांति का स्वभाव पैदा होता है, और असंतोष से हिंसा का। संतोष इंसान को यह एहसास देता है कि वह पहले से ही बहुत कुछ पा चुका है, और जो खुद को पाया हुआ समझता है, वह कभी झुंझलाहट या हिंसा का शिकार नहीं होता। इसके विपरीत, वह इंसान जो असंतोष की मानसिकता में ग्रस्त हो, वह हमेशा हीनभावना का शिकार रहेगा। उसका यह एहसास उसे लगातार उकसाता रहेगा कि जो कुछ उसने नहीं पाया, उसे किसी भी तरह प्राप्त करने की कोशिश करे। यदि वह देखता है कि वह उस चीज़ को शांतिपूर्ण तरीके से नहीं पा सकता, तो वह हिंसक तरीकों का सहारा लेकर उसे हासिल करना चाहेगा। वह उन सभी लोगों को अपना दुश्मन समझेगा, जिन्हें वह अपनी इच्छा की राह में रुकावट समझता है। वह उन लोगों से नफ़रत करेगा, उनके ख़िलाफ़ हथियार जमा करेगा। जबकि हक़ीक़त यह है कि यह सब कुछ इसलिए होगा क्योंकि वह अल्लाह द्वारा दिए गए पर राज़ी नहीं हो सका, वह संतोष के बजाय असंतोष का शिकार हो गया। पूरी धरती मस्जिद बन गई