Al-Risala · May 2026 · page 61

अपना देवा के नाम पर बलिदान करने का इरादा किया।

الرسالہ، مئی ۲۰۲۶، صفحہ ۶۱

उस समय स्थिति इतना ख़राब था कि मक्का से निकल कर सीधे मदाना जाना ख़तरे से खाली न था। इसलिए आप जब मक्का छोड़ कर निकले तो तीन दिन तक आप सौर नामक गुफ़ा में छुपे रहे, जो एक कठिन रास्ते वाले पहाड़ के ऊपर तंग जगह पर स्थित थी। फिर भी आपके दुश्मन आपको खोजते हुए वहां भी पहुंच गए। आप अपने दोस्त अबू बक्र के साथ गुफ़ा में थे और आपके दुश्मन तलवारें लिए हुए गुफ़ा के इतने पास खड़े थे कि आप उनके पैरों को देख सकते थे। मौत आपके बिल्कुल क़रीब पहुंच चुकी थी। हज़रत अबू बक्र यह देख कर बहुत घबराए। उन्होंने रसूलुल्लाह (सल्ल०) से कहा कि वे तो यहां भी आ गए। आपने बहुत इत्मीनान के साथ जवाब दिया, "ऐ अबू बक्र, उन दो के बारे में तुम्हारा क्या विचार है, जिनका तीसरा अल्लाह हो?" (सहीह अल- बुखारी, हदीस संख्या 4663)

यह वाक्य तवक्कुल (अल्लाह पर भरोसा) और विश्वास का सर्वश्रेष्ठ नमूना है। इस वाक्य में इन्सान 'तवक्कुल' के सर्वोच्च और अंतिम शिखर पर नज़र आता है। कट्टरता का कारण असंतोष पैग़म्बर-ए-इस्लाम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की एक हदीस इन शब्दों में आई है: "قد افلح من أسلم ورزق كفافاً وقنعه الله بما آتاه" (सहीह मुस्लिम, हदीस संख्या 1054)

अर्थात, वह व्यक्ति सफल हुआ जिसने इस्लाम अपनाया, जिसे आवश्यकता के

‹ Previous page Next page › Contents of May 2026 All issues

Printed page