अपना देवा के नाम पर बलिदान करने का इरादा किया।
الرسالہ، مئی ۲۰۲۶، صفحہ ۶۲
कि उन्हें इससे भी ज़्यादा मिल रहा है। व्यापारियों ने कहा, "कौन आपका इससे ज़्यादा दे रहा है, जबकि मदीने के जितने "व्यापारी हैं सब यहां जमा हैं।" हज़रत उस्मान ने कहा, "मुझे हर एक दिरहम के बदले दस दिरहम मिल रहा है। क्या तुम मुझे इससे ज़्यादा दे सकते हो?" उन्होंने कहा, "नहीं।" हज़रत उस्मान बोले, "अल्लाह ने अपनी किताब में फ़रमाया है कि जो शख्स नेकी लेकर आएगा तो उसके लिए इसका दस गुना बदला है। (सूरःअल- अनआम, 160) तो ऐ मदीने के व्यापारियो, गवाह रहो कि मैंने यह तमाम खाने का सामान अल्लाह के लिए शहर के ज़रूरतमंदों पर सदक़ा (दान) कर दिया।" (अल-शरीअह, अल-आजुरी, खण्ड 3, पृष्ठ 2012)
यह घटना ख़ुदा के वादे पर यक़ीन की बेहतरीन मिसाल है। ख़ुदा पर ईमान (विश्वास) आदमी में इसी तरह का यक़ीन और विश्वास पैदा करता है। और जिस आदमी में इस तरह का यक़ीन और विश्वास पैदा हो जाए वह स्वार्थ और लाभ-हानि से ऊपर उठ जाता है। उसके हौसले इतने बुलंद हो जाते हैं कि बड़ी से बड़ी कुर्बानी भी उसके लिए मुश्किल नहीं लगती। विश्वास और तवक्कुल पैग़म्बरे इस्लाम (सल्ल०) मक्का में पैदा हुए। आपने अपनी तब्लीग़ (इस्लाम का संदेश लोगों तक पहुँचाने) के आरम्भिक बारह साल इसी शहर में गुज़ारे।