अपना देवा के नाम पर बलिदान करने का इरादा किया।
الرسالہ، مئی ۲۰۲۶، صفحہ ۶۳
इल्म है और यह घटना इस सच्चे इल्म की आख़िरी शानदार मिसाल है। निस्सार्थता अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ि०) बयान करते हैं: अबूबक्र (रज़ि०) के ज़माने में अकाल पड़ा और लोग सख्त परेशान हो गए। अबूबक्र (रज़ि०) ने कहा, "तुम लोग न घबराओ, अल्लाह जल्द ही तुम्हारे लिए खुशहाली पैदा कर देगा।" इसके बाद ऐसा हुआ कि उस्मान (रज़ि०) का व्यापारिक क़ाफ़िला सीरिया से आया। इसमें एक हज़ार ऊंट थे और सब के सब गेहूं और अन्य खाने की चीज़ों से लदे हुए थे। यह ख़बर मदीने में फैली तो शहर के व्यापारी उस्मान (रज़ि०) के घर पहुंचे। उन्होंने दरवाज़ा खटखटाया। वह बाहर आए। उनके पास एक चादर थी, जिसको वह अपने कंधे पर इस तरह डाले हुए थे कि उसका एक सिरा सामने की तरफ़ लटक रहा था और दूसरा सिरा पीछे की तरफ़। उस्मान (रज़ि०) ने पूछा कि तुम लोग क्यों आए हो और मुझसे क्या चाहते हो? व्यापारियों ने कहा "हम को यह बात पता चली है कि आपके पास एक हज़ार ऊंट गेहूं और खाने का सामान आया है। हम उनको खरीदना चाहते हैं। आप हमें यह खाद्य सामग्री बेच दें, ताकि हम इसको मदीने के ज़रूरतमंदों तक पहुंचा सकें।" उस्मान (रजि.) ने कहा कि अंदर आओ और घर में बैठ कर बात करो। वे लोग घर में दाखिल हुए तो देखा कि खाद्य सामग्री के एक हज़ार ढेर घर के अंदर पड़े हुए हैं।