अपनी कमज़ोरी
الرسالہ، جولائی ۲۰۲۶، صفحہ ۵۸
جھگڑا ہواII اسکے بعد ٹائمس آف انڈیا (29 مئی 1990) کے مطابق جو ہوا، وہ یہ تھا:
"The accused Anant Ram, a habitual drunkard, was enraged when his wife refused to give him the money he asked for. Giving way to his tantrums, he dashed his son Arjun against the floor, thus killing him then and there."
अनंत राम, जो शराब का आदी था, जब उसकी पत्नी ने पैसे देने से मना कर दिया, तो वह गुस्से में आग बबूला हो गया। गुस्से में आपा खोकर उसने अपने 2 साल के बेटे (अर्जुन) को कई बार उठाकर ज़मीन पर पटक दिया। इसके नतीजे में बच्चा वहीं मौके पर मर गया। जब इंसान गुस्से में होता है, तो उस समय वह शैतान के क़ब्ज़े में होता है। उस वक्त वह किसी भी अमानवीय हरकत को अंजाम दे सकता है, यहां तक कि अपने ही बच्चे की निर्दयता से हत्या भी कर सकता है। यह एक ऐसी कमज़ोरी है जो हर इंसान के अंदर मौजूद होती है। समाज में सुरक्षित और कामयाब ज़िंदगी गुज़ारने का तरीका यह है कि इंसान दूसरों को गुस्सा दिलाने से बचे। समझदारी से कोशिश करे कि कोई भी व्यक्ति उस भावनात्मक स्थिति तक न पहुंचे, जब वह शैतान के क़ब्ज़े में चला जाए और पागलपन भरी हरकतें कर बैठे, जैसा कि ऊपर के वाक्य में देखा गया। गुस्सा और बदले की भावना किसी विशेष क़ौम या समुदाय से जुड़ी नहीं है।
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