Al-Risala · July 2026 · page 60

अपनी कमज़ोरी

الرسالہ، جولائی ۲۰۲۶، صفحہ ۶۰

का अथ ह नागवार बातो का बदश्त करना, गुस्म के बावजूद शांत रहना, दूसरों के अनुचित व्यवहार पर भी बदले में बुरा व्यवहार न करना, निराशाजनक परिस्थितियों में भी हौसला न खोना, नुक़सान के बाद भी उम्मीद बनाए रखना, अंधेरे हालात में भी रोशनी की किरण देख लेना । सबसे बड़ी कुर्बानी यह है कि इंसान के सीने में ग़ुस्से और बदले की आग भड़क उठे, मगर वह उसे अपने भीतर ही बुझा दे। कोई उसे तकलीफ़ दे, फिर भी वह उसके बारे में बदगुमान न हो। अगर इंसान का सामना नकारात्मक परिस्थितियों से हो, तब भी वह सकारात्मक सोच पर क़ायम रहे – हालात से ऊपर उठकर जिए, हालात के भीतर नहीं। कर्म, न कि प्रतिक्रिया अमेरिका की कंपनी आईबीएम (IBM) कंप्यूटर के क्षेत्र में इतनी आगे थी कि उसे कंप्यूटर की दिग्गज कंपनी (computer giant) कहा जाता था। कुछ साल पहले इसके अधिकारियों ने जापान की कंप्यूटर बनाने वाली कंपनियों का मज़ाक उड़ाते हुए कहा था – “जब आईबीएम छींकती है, तो जापान के कंप्यूटर निर्माता उड़ जाते हैं।”

When IBM sneezes, Japanese computer makers are blown away.

‹ Previous page Next page › Contents of July 2026 All issues

Printed page