Al-Risala · July 2026 · page 61

अपनी कमज़ोरी

الرسالہ، جولائی ۲۰۲۶، صفحہ ۶۱

तरक़्क़ी है— इसके सिवा और कोई तरक़्क़ी इस दुनिया में असरदार नहीं। क़ीमत का मसला मौलाना फ़रीद अल-वहीदी जद्दा में रहते हैं। उन्होंने 1 नवंबर 1991 की एक मुलाक़ात में एक बहुत अर्थपूर्ण वाक्य कहा: जो व्यक्ति माउंट एवरेस्ट पर विजय प्राप्त करना चाहता है वह कभी अपने जूतों की क़ीमत नहीं देखता। One who wants to conquer the Mount Everest never counts the cost of his shoes. अगर आपके सामने छोटा मक़सद हो तो आप उसे मामूली कोशिश से हासिल कर सकते हैं। लेकिन अगर आपने अपने लिए कोई बड़ा लक्ष्य चुना है, तो यह भी समझना होगा कि बड़ा लक्ष्य बड़ी क़ीमत भी माँगता है। जो व्यक्ति बड़ा मक़सद पाना चाहता है, उसे बड़ी क़ीमत चुकाने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। बड़ी कामयाबी किसी की जागीर नहीं। हर इंसान बड़ी कामयाबी तक पहुँच सकता है। इसके बावजूद हम देखते हैं कि बहुत कम लोग बड़ी कामयाबी हासिल करते हैं, और इसकी वजह यही है कि वे उस कामयाबी की क़ीमत नहीं देते। बाज़ार में कम कीमत पर कम चीज़ मिलती है और ज़्यादा कीमत पर

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