Al-Risala · January 2026 · page 52

زندگی کی تلخیاں

الرسالہ، جنوری ۲۰۲۶، صفحہ ۵۲

बड़ा पादरा सफ़र दनूस शहर का दीवार पर चढ़ा, उसन मुस्लिम फ़ाज़ का सम्बोधित करते हुए कहा कि हम तुमसे सुलह करना चाहते हैं, लेकिन शर्त यह है कि सुलह तुम्हारे 'अमीर' के हाथ पर होगी। इस विषय का एक पत्र मदीना भेजा गया, ताकि अमीरुल मोमिनीन फ़िलिस्तीन आएं और फिलिस्तीन वालों से सुलह का मामला तय करें। उमर फ़ारूक़ मदीने से बेतुल मक़िदस जाने के लिए निकले, हाल यह था कि उनके साथ सिर्फ एक सवारी और एक गुलाम था। जब वह शहर से बाहर आए तो उन्होंने अपने गुलाम से कहा, “हम दो हैं और सवारी एक है। अगर मैं सवारी पर बैठूं और तुम पैदल चलो तो मैं तुम्हारे ऊपर जुल्म करूंगा और अगर तुम सवारी पर बैठो और मैं पैदल चलूं तो तुम मेरे ऊपर ज़ुल्म करेंगे और अगर हम दोनों सवारी पर बैठें तो हम उसकी पीठ तोड़ डालेंगे। इसलिए हम लोग तीन बारी तय कर लें। इस तरह उन्होंने रास्ता इस तरह तय किया कि एक बार उमर सवारी पर बैठते और गुलाम पैदल चलता। इसके बाद गुलाम सवारी पर चलता और उमर पैदल चलते और फिर दोनों पैदल चलते और सवारी खाली रहती। इसी तरह वे सफ़र करते रहे और यहां तक कि वह बैतुल मदिस के पास पहुंच गए। इत्तफ़ाक़ से उस समय गुलाम की बारी थी। गुलाम ने सवारी पर बैठकर चलने से इंकार किया और चाहा कि आख़िरी चरण में शहर में दाख़िला इस हाल में

‹ Previous page Next page › Contents of January 2026 All issues

Printed page